श्री चिंतामण गणेश मंदिर, UJJAIN

चिंतामण गणेश मंदिर एक बहुत ही पवित्र मंदिर है, जो कि उज्जैन शहर मे है।

चिंतामण का अर्थ “मन की चिंता से मुक्ति” होता है। मंदिर में भगवान गणेश जी के तीन रूप देखने को मिलते हैं, चिंतामण गणेश, इच्छामन गणेश और सिद्धिविनायक गणेश।

यहाँ की मान्यता है की जब आप यहां पर आपकी चिंताओं के साथ दर्शन करने को आते हैं और अपनी चिंताओं को भगवान चिंतामण गणेश जी के समक्ष छोड़कर जाते हैं तो चिंतामण गणेश भगवान आपकी चिंताओं से आपको मुक्ति दिलाते हैं। इसी प्रकार इच्छामन गणेश भगवान आपकी इच्छाओं को पूरी करते हैं और सिद्धिविनायक गणेश आपको सिद्धि प्रदान करते हैं। इसके अलावा मंदिर में आपको रिद्धि सिद्धि की प्रतिमा भी देखने को मिलती है.

मंदिर के सामने ही आज भी वह बावडी मौजूद है। जहां पर दर्शनार्थी दर्शन करते है। इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप महारानी अहिल्याबाई द्वारा करीब 250 वर्ष पूर्व बनाया गया था। इससे भी पूर्व परमार काल में भी इस मंदिर का जिर्णोद्धार हो चुका है। यह मंदिर जिन खंबों पर टिका हुआ है वह परमार कालीन हैं।

देश के कोने-कोने से भक्त यहां दर्शन करने आते है। यहां पर भक्त, गणेश जी के दर्शन कर मंदिर के पीछे उल्टा स्वास्तिक बनाकर मनोकामना मांगते है और जब उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है तो वह पुनः दर्शन करने आते है और मंदिर के पीछे सीधा स्वास्तिक बानाते है। कई भक्त यहां रक्षा सूत्र बांधते है और मनोकामना पूर्ण होने पर रक्षा सूत्र छोडने आते है।

चैत्रमास की यात्रा

प्रथम पूज्य गणेश भगवान केा धन्यवाद देने के लिए इस पावन पर्व का आयोजन किया जाता है। यात्रा की शुरुआत चैत्र मास के बुधवार से हेाती हैं । जो इस महीने के प्रति बुधवार को मनाया जाता है । आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसान मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। अब यात्रा की इस परंपरा में अब किसानेां के साथ साथ आम लोग भी इसमें शामिल होने लगे हैं।

यात्रा के समय चिंतामण के अलावा अन्य गणेश मंदिरों में यात्रा की धूम रहती है। गजानन भगवान का इस दिन विशेष श्रृंगार किया जाता है। मंदिर का प्रांगण की सजावट बहुत ही आकर्षित हेाती है । दुकाने सजी हुई व लोगों को यात्रा को लेकर बहुत उत्साहित रहते हैं । चारों ओर लोगों की चहल पहल दिखाई पड़ती है।

इस उत्सव के दौरान भगवान को विशेष भोग भी लगाया जाता है। लोग मंदिरों में अपनी मान्याता पूरी होने पर क्विटलों से भोग लगाते हैं। इसमें लोंगो द्वारा दान पुण्य भी किया जाता है। चैत्र माह के आखिरी बुधवार को इसका समापन हो जाता है।

तिल महोत्सव

मकर संक्रांति पर पतंग के साथ तिल का भी महत्व है और पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की माघ मास में तिल चतुर्थी पर तिल का भोग लगाने का महत्व है| महिलाएं इस दिन व्रत करती है| और चिंतामण गणेश को तिल का भोग लगाती है| समय के अनुसार तिल चतुर्थी पर अब चिंतामण गणेश पर भव्य आयोजन होने लगा और सवा लाख लड्डूओं का महाभोग लगने लगा है| उज्जैन के साथ आस पास के लोग भी हजारो की संख्या में आने लगे और अब चतुर्थी पर भव्य तिल मेले के साथ भक्तो एवं ग्रामवासी के सहयोग से फरियाली खिचड़ी, दूध, जलेबी, हलवे की व्यवस्था इस दिन भक्तो के लिए रहती है| तिल चतुर्थी पर दर्शन मात्र से ही सभी भक्त चिंता से मुक्त रहते है|


यह मंदिर उज्जैन रेलवे स्टेशन से 7 किलोमीटर और महाकालेश्वर मंदिर से 5 किलोमीटर दूर है।

आप यहां पर आने के लिए ट्रेन से उज्जैन या हवाई यात्रा के जारी भोपाल और इंदौर आ सकते है, उसके बाद आप ट्रेन बस या पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सहायता से यहां पहुंच सकते हैं।

यहाँ पर रुकने के लिए होटल की व्यवस्था है जिसकी बुकिंग आप नीचे दी गई लिंक के मध्यम से कर सकते हैं।

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